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"मुक्ति दिलाये यीशु नाम" जनवरी 12, 2017

Jan 11, 2017

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"मुक्ति दिलाये यीशु नाम" जनवरी 12, 2017 
पवित्र वचन : - तुम में से कौन ऐसा मनुष्य है, कि यदि उसका पुत्र उससे रोटी मांगे तो वह उसे पथर दे? या मछली मांगे तो वह उसे सांप दे? तुम बुरे होकर भी अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों नहीं देगा। मति 7:9-11  
प्रभु की आशीष : - परमेश्वर का वचन सत्य है। इससे पहिले वाले वचन में हमने पड़ा था कि सर्वउच्च परमेश्वर हमे मांगने पर पवित्र आत्मा की बख्शीश देता है क्योंकि परमेश्वर का पवित्र वचन बताता है कि हम प्रभु यीशु के नाम पर जो भी मांगे वह हमे दिया जायेगा। हमे सृष्टिकर्ता पवित्र परमेश्वर से इतना अनमोल खजाना मिला और हम उस पर अटल विश्वास नहीं करते। उधर दूसरी ओर हम संसारी वसिहिअत पर जी जान से विश्वास कर थोड़ी सी जयदाद के लालच में पड़ जाते हैं। उस समय सचमुच हमारा व्यवहार अविश्वासियों की तरह ही हो जाता है और हम यह भी भूल जाते हैं कि हम एक नई उपज हैं और हम स्वर्ग से हैं तथा पृथ्वी पर परमेश्वर के राजदूत है।   
इन आयतों में प्रभु ने एक छोटे बच्चे तथा उसके संसारी पिता की बात की है जब एक पुत्र अपने संसारी पिता से मांगता है तो वह पिता अपनी तुच्छ पूंजी में से भी उसकी ज़रूरत पूरी करता है। वह संसारी पिता यदि उसको वही वस्तु नहीं भी दे पाता तो उससे मिलती जुलती दूसरी वस्तु देता है। वह उसे अच्छी से अच्छी वस्तु देने का यत्न करता है पर किसी भी स्थिति में वह बच्चे को पीड़ा देने वाली या उसका नाश करने वाली वस्तु नहीं देता। वह कभी भी उसे रोटी मांगने पर पथर अथवा मछली मांगने पर सांप नहीं देता। प्रभु कहते हैं कि जब संसारी दुष्ट पिता अपने बच्चे को उत्तम से उत्तम वस्तु देता है तो स्वर्गीय पिता जो परम पवित्र तथा कृपालु है वह अपने बच्चों को सर्वोपरि पवित्र आत्मा की बख्शीश क्यों नहीं देगा। हमे ज़रूरत है कि हम अपने दयालु परमेश्वर से मांगें और हम अवश्य प्राप्त करेंगे। 
प्रियो यह प्रार्थना का विषय है कि जब भी हम प्रार्थना में मांगते हैं तो परमेश्वर हमारी प्रार्थनाएं सुनता है तथा वह अपने स्वर्गीय भंडारों में से हमारी ज़रूरतें पूरी करता है। हमे चाहिए की हम अपने स्वर्गीय पिता से प्रार्थना में विश्वास के साथ मांगे तो हम अपनी आवश्यकताएं प्राप्त करेंगे। पर फिर भी यदि हमे प्राप्ति नहीं हुई तो इसका अर्थ यह नहीं कि हमारी प्रार्थना सुनी नहीं गयी। परमेश्वर हमारी सारी प्रार्थनाएं सुनता है और हम विश्वास करें कि परमेश्वर हमे उससे भी उत्तम वस्तु देना चाहता है। हमे यह भी याद रखने की आवश्यकता है कि हम परमेश्वर के विधान को नहीं बदल सकते। 
पिता का हमारे साथ अनन्त प्रेम है जिसने हमारे साथ प्रेम में अपने इकलौते पुत्र को भी नहीं बचाया। हमारे पिता परमेश्वर की यही इच्छा है कि हम बचाये जाएँ तथा उसके लिए हमारा प्रभु यीशु में अटल विश्वास होना आवश्यक है। इस समय हम अंतिम दिनों में से गुज़र रहे हैं तथा प्रभु यीशु हमे स्वर्ग में ले जाने के लिए आने वाला है। आओ हम विश्वास के साथ प्राथना करते रहें और प्रभु के आने पर उसे इंतज़ार करते हुए मिलें। अमिन     
वचन : -  यर्मियाह 24:6; 29:11; यूहन्ना 14:13-14; 15:7; 16:23-24; 1 यूहन्ना 5:14-15    
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"मुक्ति दिलाये यीशु नाम" जनवरी 12, 2017 

पवित्र वचन : - तुम में से कौन ऐसा मनुष्य है, कि यदि उसका पुत्र उससे रोटी मांगे तो वह उसे पथर दे? या मछली मांगे तो वह उसे सांप दे? तुम बुरे होकर भी अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों नहीं देगा। मति 7:9-11  

प्रभु की आशीष : - परमेश्वर का वचन सत्य है। इससे पहिले वाले वचन में हमने पड़ा था कि सर्वउच्च परमेश्वर हमे मांगने पर पवित्र आत्मा की बख्शीश देता है क्योंकि परमेश्वर का पवित्र वचन बताता है कि हम प्रभु यीशु के नाम पर जो भी पिता से मांगे वह हमे दिया जायेगा। हमे सृष्टिकर्ता पवित्र परमेश्वर से इतना अनमोल खजाना मिला और हम उस पर अटल विश्वास नहीं करते। उधर दूसरी ओर हम संसारी वसिहिअत पर जी जान से विश्वास कर थोड़ी सी जयदाद के लालच में पड़ जाते हैं। उस समय सचमुच हमारा व्यवहार अविश्वासियों की तरह ही हो जाता है और हम यह भी भूल जाते हैं कि हम एक नई उपज हैं और हम स्वर्ग से हैं तथा पृथ्वी पर परमेश्वर के राजदूत है।

इन आयतों में प्रभु ने एक छोटे बच्चे तथा उसके संसारी पिता की बात की है जब एक पुत्र अपने संसारी पिता से मांगता है तो वह पिता अपनी तुच्छ पूंजी में से भी उसकी ज़रूरत पूरी करता है। वह संसारी पिता यदि उसको वही वस्तु नहीं भी दे पाता तो उससे मिलती जुलती दूसरी वस्तु देता है। वह उसे अच्छी से अच्छी वस्तु देने का यत्न करता है पर किसी भी स्थिति में वह बच्चे को पीड़ा देने वाली या उसका नाश करने वाली वस्तु नहीं देता। वह कभी भी उसे रोटी मांगने पर पथर अथवा मछली मांगने पर सांप नहीं देता। प्रभु कहते हैं कि जब संसारी दुष्ट पिता अपने बच्चे को उत्तम से उत्तम वस्तु देता है तो स्वर्गीय पिता जो परम पवित्र तथा कृपालु है वह अपने बच्चों को सर्वोपरि पवित्र आत्मा की बख्शीश क्यों नहीं देगा। हमे ज़रूरत है कि हम अपने दयालु परमेश्वर से मांगें और हम अवश्य प्राप्त करेंगे। 

प्रियो यह प्रार्थना का विषय है कि जब भी हम प्रार्थना में मांगते हैं तो परमेश्वर हमारी प्रार्थनाएं सुनता है तथा वह अपने स्वर्गीय भंडारों में से हमारी ज़रूरतें पूरी करता है। हमे चाहिए की हम अपने स्वर्गीय पिता से प्रार्थना में विश्वास के साथ मांगे तो हम अपनी आवश्यकताएं प्राप्त करेंगे। पर फिर भी यदि हमे प्राप्ति नहीं हुई तो इसका अर्थ यह नहीं कि हमारी प्रार्थना सुनी नहीं गयी। परमेश्वर हमारी सारी प्रार्थनाएं सुनता है और हम विश्वास करें कि परमेश्वर हमे उससे भी उत्तम वस्तु देना चाहता है। हमे यह भी याद रखने की आवश्यकता है कि हम परमेश्वर के विधान को नहीं बदल सकते। 

पिता का हमारे साथ अनन्त प्रेम है जिसने हमारे साथ प्रेम में अपने इकलौते पुत्र को भी नहीं बचाया। हमारे पिता परमेश्वर की यही इच्छा है कि हम बचाये जाएँ तथा उसके लिए हमारा प्रभु यीशु में अटल विश्वास होना आवश्यक है। इस समय हम अंतिम दिनों में से गुज़र रहे हैं तथा प्रभु यीशु हमे स्वर्ग में ले जाने के लिए आने वाला है। आओ हम विश्वास के साथ प्राथना करते रहें और प्रभु के आने पर उसे इंतज़ार करते हुए मिलें। अमिन     

वचन : -  यर्मियाह 24:6; 29:11; यूहन्ना 14:13-14; 15:7; 16:23-24; 1 यूहन्ना 5:14-15    

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