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यीशु का लहू सर्वश्रेष्ठ और उच्चतम है

Jul 15, 2020

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यीशु का लहू सर्वश्रेष्ठ और उच्चतम है

इब्रानियों की पुस्तक हमें उस लहु के बारे में बताती है “जो हाबिल के लहु से उत्तम बातें कहता है”। (इब्रानियों 12:24)

हाबिल के लहु ने दण्ड के लिए पुकार की जबकि यीशु का लहू क्षमा के लिए पुकारता है ।

जीवन के जटिल रसायन विज्ञान में लहू अद्वितीय है । शरीर में बहुत से अन्य प्रकार के द्रव्य पाये जाते हैं जैसे कि लार, आंसू एवं अमाशय के पाचन द्रव्य आदि । लेकिन ये सभी शरीर के उत्पाद हैं । परन्तु लहू शरीर का हिस्सा है – जैसे कि हाथ और बाल शरीर के हिस्से हैं लहू में दोनों लाल एवं श्वेत कण पाये जाते हैं और हमारे शरीर में लहू निरंतर गतिशील रहता है । लहू के अरबों कण होते हैं जिनमे प्रतियेक कण 120 दिन तक जीवित रहता है, और फिर मर जाता है और मरे हुओं की जगह दूसरे कण लेते रहते हैं।

लहू का रसायन विज्ञान अत्यंत जटिल है । मात्र हिमोग्लोबिन ही कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन लौह, आक्सीजन और गंधक के हज़ारों अणुओं से मिल कर बना है । इनमें से प्रत्येक अणु को अपने पड़ोसी अणुओं से एकदम सही से जुड़ना होता है । इस प्रकार का पदार्थ अपने आप से उत्पन्न नहीं हो सकता । हम लहू का उस की श्रेणी के आधार पर वर्गीकरण करते हैं । इससे पहले कि एक व्यक्ति का लहू दुसरे व्यक्ति को चढ़ाया जाए रक्तदाता एवं रक्त प्राप्तकर्ता के रक्त की श्रेणी का एक होना आवश्यक है। विज्ञान बताता है  कि प्रत्येक व्यक्ति के लहू की श्रेणी दूसरों से उतनी ही भिन्न एवं विशिष्ट होती है जितनी कि उनके उँगलियों की छाप। लहू हमारे शरीर की जीवनधारा है और अपने कार्य एवं स्वरूप में भी अदभुत होती है ।

अब हम यीशु और उसके लहु के विषय में बात करते हैं | हम यह सत्य जानते हैं कि यीशु का लहू विशिष्ठ और सर्वोच्च है क्योंकि यीशु का लहू अद्वितीय था इस श्रेणी के लहू का प्रसारण कभी भी मानव रक्त कोशिकाओं में नहीं बहा । हम मनुष्यों का लहू पाप के द्वारा कलंकित है परन्तु उसका लहू परमपवित्र था। उसका लहू ईश्वरीय था क्योंकि वह स्वर्ग से था । परमेश्वर के पुत्र के विषय में यह अनिवार्य तथ्य है कि वह कुआंरी कन्या से जन्मा था। उस की मानव माँ तो थी परन्तु कोई मानव पिता नहीं था । बाइबिल बताती है पवित्र आत्मा मरियम के ऊपर आया और परम प्रधान की सामर्थ ने उसके ऊपर छाया की और ये सुनिश्चित किया कि यीशु का लहु, पाप से शुद्ध रखा जाये । यह एक महत्त्वपूर्ण बिंदु है । माँ के गर्भ में विकसित हो रहे भ्रूण की धमनियों में जो लहू दौड़ रहा था वह उसकी माँ से नहीं आया था । शिशु का लहू उसका अपना लहू था जो विकसित होते हुये भ्रूण के शरीर द्वारा उत्पादित किया गया था । यह केवल एक भ्रूण के गर्भस्थ होने के बाद होता है कि वह रक्त पैदा करना शुरू करता है । बच्चे के लहू की प्रत्येक बूँद उस भ्रूण के द्वारा उत्पन्न हुई । चूंकि माँ के गर्भ में पल रहे उस बच्चे के लहू की श्रेणी माँ के लहू से पूरी तरह से भिन्न थी। उस के शरीर ने यह सुनिश्चित किया कि माँ के लहू से शिशु का लहू किसी कारण भी प्रभावित न हो |

यीशु कुंवारी से उत्पन्न हुआ, इसका मतलब था कि उसके अन्दर मनुष्य पिता के लहू की एक बूँद भी नहीं थी और ना ही अपने माँ के लहू की एक भी बूँद । जो लहू  उसकी धमनियों में प्रवाहित हो रहा था वह पवित्रात्मा के छाया करने के प्रत्यक्ष कार्य के द्वारा पैदा हुआ अद्वितीय लहू था । यह पाप रहित लहू था । यह बहाया हुआ लहू था । यह उद्धार देने वाला लहू है। और अब पवित्रात्मा हमें बताता है कि यह बोलने वाला लहू है । हाबिल का लहू बोला और परमेश्वर उसे सुन सका । यह प्रतिशोध मांग रहा था । यह दण्ड मांग रहा था । पृथ्वी की धूल में से पुकार कर यह दण्ड की मांग कर रहा था । हत्यारा केन अजनबी बन गया और धरती पर भटकता फिरा और उसके भाई के लहू की आवाज़ उसका पीछा करती रही ।
मसीह का बहुमूल्य लहू भी ज़ोर से पुकारता है क्योंकि वह दुष्ट लोगों के द्वारा बहाया गया था । यह दण्ड की नहीं वरन हमारे छुटकारे की मांग करता है । और यह पृथ्वी से नहीं वरन महिमा से पुकारता है ,प्रायश्चित के ढक्कन से ।
प्रायश्चित के वार्षिक दिन पर महापुरोहित बलिदान के लहू को लेकर परमपवित्र स्थान में जाता था और उसे प्रायश्चित के ढक्कन पर छिड़कता था । पुराने नियम के प्रतीक गणित की तरह परिशुद्ध हैं । जो बलिदान के लहू के द्वारा प्रतीकात्मक रूप से किया गया वही यीशु के लहू के द्वारा किया गया । वह उसे स्वर्ग में ले गया और उसे सच्चे प्रायश्चित के ढक्कन के ऊपर उंडेल दिया । (इब्रानियों 9 : 11 -28 )
कितनी बहुमूल्य है वो धारा,
जो धो कर करती श्वेत हिम के समान ,
कोई और झरना ना मैं जानता,
कुछ नहीं परन्तु यीशु के लहू के सिवाय।


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