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बाबा साहिब का समाजिक स्थान "बाप का भी बाप"

Jul 19, 2020

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बाबा साहिब का समाजिक स्थान "बाप का भी बाप" 
यह बात सन1989 की है जब मेरी पोस्टिंग उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में सीनियर मंडल वाणिज्य प्रवन्धक के रूप में थी | भारत सरकार की ओर से सभी सरकारी कार्यालयों में बाबा साहेब की जयंती मनाने के आदेश हुए थे और उसी के अनुसार मुरादाबाद में भी बाबा साहेब आंबेडकर की त्यांति मनाई गई | हमारे मंडल रेल प्रवन्धक श्री पांडे जी ने इस कार्यक्रम का इंतज़ाम मुझे करने के लिए कहा था | 
प्रोग्राम वाले दिन जब फंक्शन चल रहा था और उस में जब मुरादाबाद के मौर्य नामक जन नायक को स्टेज पर बुलाया गया तो उन्होंने बाबा साहेब के बारे सुंदर भाषण देने के बाद में स्टेज से एक प्रश्न किया जो इस प्रकार था | "हम ने नेहरू जी को चाचा बना लिया और गाँधी को बापू बना लिया पर ऐसा कोई भी रिश्ता बाबा साहिब के साथ नहीं जोड़ा" | 
वह उस के बाद बैठ गए और प्रोग्राम आगे अंतिम चरण की ओर बढ़ गया | अंत में मंडल रेल प्रवन्धक श्री पांडे जी धन्यवाद प्रस्ताव के साथ प्रोग्राम को समाप्त  करना था | पांडे जी ने मौर्या जी को बहुत सुंदर शब्दों में उन के प्रश्न का उत्तर दिया और बोले कि ठीक है हम गाँधी को बापू और नेहरू को चाचा बोलते हैं पर आंबेडकर जी को तो हम बाबा बोलते हैं जो बाप का भी बाप होता है | पांडे जी के इन शब्दों पर हम सभी का सर बाबा साहिब के समक्ष श्रद्धा से झुक गया और सभी की आँखों में आंसू आ गए जो कृतिग्यता और आनंद के आंसू थे | हमारे बाबा तो बाप के भी बाप हैं | जय भीम   

बाबा साहिब का समाजिक स्थान "बाप का भी बाप" 

यह बात सन1989 की है जब मेरी पोस्टिंग उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में सीनियर मंडल वाणिज्य प्रवन्धक के रूप में थी | भारत सरकार की ओर से सभी सरकारी कार्यालयों में बाबा साहेब की जयंती मनाने के आदेश हुए थे और उसी के अनुसार मुरादाबाद में भी बाबा साहेब आंबेडकर की त्यांति मनाई गई | हमारे मंडल रेल प्रवन्धक श्री पांडे जी ने इस कार्यक्रम का इंतज़ाम मुझे करने के लिए कहा था | 

प्रोग्राम वाले दिन जब फंक्शन चल रहा था और उस में जब मुरादाबाद के मौर्य नामक जन नायक को स्टेज पर बुलाया गया तो उन्होंने बाबा साहेब के बारे सुंदर भाषण देने के बाद में स्टेज से एक प्रश्न किया जो इस प्रकार था | "हम ने नेहरू जी को चाचा बना लिया और गाँधी को बापू बना लिया पर ऐसा कोई भी रिश्ता बाबा साहिब के साथ नहीं जोड़ा" | 

वह उस के बाद बैठ गए और प्रोग्राम आगे अंतिम चरण की ओर बढ़ गया | अंत में मंडल रेल प्रवन्धक श्री पांडे जी धन्यवाद प्रस्ताव के साथ प्रोग्राम को समाप्त  करना था | पांडे जी ने मौर्या जी को बहुत सुंदर शब्दों में उन के प्रश्न का उत्तर दिया और बोले कि ठीक है हम गाँधी को बापू और नेहरू को चाचा बोलते हैं पर आंबेडकर जी को तो हम बाबा बोलते हैं जो बाप का भी बाप होता है | पांडे जी के इन शब्दों पर हम सभी का सर बाबा साहिब के समक्ष श्रद्धा से झुक गया और सभी की आँखों में आंसू आ गए जो कृतिग्यता और आनंद के आंसू थे | हमारे बाबा तो बाप के भी बाप हैं | जय भीम

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